मंत्र सिद्ध कैसे करें I mantra siddhi kaise kare
जब हम भक्ति मार्ग पर अग्रसर होते हैं और किसी देवी या देवता के लिए मंत्र का जाप करते हैं तो एक समय के बाद में हमारे मन में यह प्रश्न उठने लगता है अथवा जिज्ञासा होने लगती है कि मैं जो मंत्र जाप कर रहा हूं क्या यह एक्टिव हो चुका है ? क्या यह मेरे लिए काम कर रहा है ? मुझे कैसे पता चले कि यह मंत्र अपना कुछ असर भी मेरे जीवन में दिख रहा है कि नहीं ? इसी जिज्ञासा के विषय पर मैं कुछ बिंदु आपके सामने बताना चाहूंगा कि हम ऐसी क्या पद्धति अपने जीवन में अपनाएं जिससे कि अपने द्वारा किए जाने वाले मन्त्रों को न केवल को सिद्ध कर सकें बल्कि यह हमारे लिए सामान्य बात बन जाये कि आज की हमारी साधना कितना रंग लाइ है। अगर आप यकीं करें तो मैं आपको ऐसा मार्ग सुझाने वाला हूँ जो आपके आध्यात्मिक जीवन को आमूलचूल तरीके से बदल देगा और आप दिव्य शक्ति से जुड़ भी जायेंगे। फिर आपका जीवन एक योगी का जीवन भी बन सकता है। आप सबके साथ उठेंगे, बैठेंगे, खाएंगे, जायेंगे लेकिन अपने आराध्य से आप इस प्रकार जुड़ जायेंगे कि आपको उसके अलावा कुछ याद ना रहे और आपका मोक्ष का मार्ग भी प्रशस्त हो जाय।
निम्न बिंदु हैं, जिन्हे अपनाकर आप अपना मन्त्र तेजी से सिद्ध कर सकते हैं :
1. स्वयं का आसन : इस हेतु सर्वप्रथम आपके पास अपना खुद का एक आसन होना चाहिए। लाल कलर का ऊनी आसन, जिस पर केवल आप बैठकर मंत्र जाप करें या नाम जप करें। उस पर कोई और कभी भी ना बैठे। वह आसन सिर्फ और सिर्फ आपका हो और जब आप ध्यान या मंत्र, जप कुछ भी करें तो उस आसन के ऊपर बैठकर करें।
2. जागृत माला : मंत्र जाप का सबसे बड़ा हथियार माला होती है और वह जागृत होनी चाहिए। कुछ लोग सोचेंगे यह जागृत माला क्या होती है तो जब हम कोई नई माला लाते हैं तो बाकायदा उसका पूजन होना चाहिए ,उसका अभिषेक होना चाहिए ,पंचामृत से और कम से कम 1 दिन के लिए वह आपके मंदिर में रखी हुई होनी चाहिए और भगवान से प्रार्थना करनी चाहिए कि आप अपनी शक्तियां इस माला में डालिये, तो फिर वह माला जागृत हो जाती है और आप जितना भी जाप करते हैं वह उसे माला में स्टोर होता है। आप यह मत सोचिए आपने जप कर लिया तो माला सामान्य ही रहेगी। आपका जप माला में स्टोर होता है और बहुत खराब कंडीशन अर्थात भूत प्रेत बाधा में अगर हम उस माला को काम में लें तो वह माल अपना असर दिखाती है।
गुरु मंत्र या चुना हुआ मंत्र : आप जो मंत्र जपोगे वह अगर गुरु द्वारा दिया गया है तब तो बहुत अच्छी बात है क्योंकि आपको हमेशा वही मंत्र जपना है लेकिन अगर आपके कोई गुरु नहीं है तो आपको ऐसा मंत्र चुनना चाहिए है कि उन देवी या देवता से आपका एक दिल से कनेक्शन हो क्योकि जिनसे हमारा कनेक्शन होता है उनके मंत्र जाप में हमे रूचि और भाव उत्पन्न होता है। अन्यथा फिर जन्म पत्रिका के हिसाब से आपके लिए कौन से देवी देवता सूट करते हैं उनका मंत्र आपको चुनना चाहिए क्योकि जन्मपत्रिका में हमारे जो इष्ट होते हैं, उनका मंत्र जल्दी प्रभाव दिखाता है। यह आपकी कुंडली के पहले और पांचवे भाव में देखा जा सकता है।
गुरु : मंत्र साधना में सिद्धि प्राप्त करने के लिए गुरु का होना अत्यंत आवश्यक है अगर आपके पास कोई भौतिक गुरु नहीं है तो आप भगवान शंकर को एक बार अपना गुरु मान लीजिए। हाथों में जल चावल पुष्प लेकर यह संकल्प लीजिए। है, महादेव मैं आपको अपना गुरु बनाता हूं, आप भक्ति के मार्ग में मुझे मार्गदर्शन करें, जब तक मुझे भौतिक गुरु नहीं मिलता, आप मेरे गुरु बने और मुझे इस मार्ग पर आगे बढ़ाएं। महादेव को गुरु चुनने के बाद आप कोई भी मंत्र जाप करें लेकिन फिर महादेव के ओम नमः शिवाय की एक या दो माला आपको रोज जपनी पड़ेगी क्योंकि वह आपके गुरु बन चुके हैं तो गुरु की माला हमें जपना अनिवार्य होता है। महादेव की माला जपकर वैसे भी आपके भीतर अलग ही परिवर्तन होना अवश्य हो जाता है।
मंत्र गोपनीय रखें : आप जो भी मंत्र जाप कर रहे हैं उसका गोपनीय रहना बहुत आवश्यक है। आप चलते-फिरते लोगों को बता नहीं सकते कि मैं यह मंत्र जपता हूं या यह करता हूं। आपको उसे पूर्णतया दुनिया से छुपा के रखना चाहिए और गोपनीय रखना चाहिए। आपकी पत्नी को भी , बच्चों को भी, घर वालों को भी पता ना चले कि आप कौन सा मंत्र जाप करते हैं फिर उसका प्रभाव बढ़ना शुरू हो जाता है। दरअसल मंत्र जाप का ढिंढोरा नहीं पीटना चाहिए। दैव्य शक्तियां आपसे कनेक्शन में दुनिया की बाधा पसंद नहीं करतीं।
नियमितता : आपके मंत्र जाप में नियमितता होनी चाहिए। अगर आप रोज सुबह का नियम बनाएं कि मैं इतने बजे मंत्र जाप करूंगा तो उतने बजे आप जप के लिए बैठ जाइए। 10 - 15 मिनट ,आधा घंटे का कभी-कभी फर्क हो तो चलता है लेकिन ऐसा नहीं हो कि कभी आप सुबह बैठ रहे हैं ,कभी रात को बैठ रहे हैं, कभी कर ही नहीं रहे हैं। आपको एक नियमितता बनानी होगी ,समय फिक्स करना होगा। आप सुबह और शाम दोनों समय भी कर सकते हैं। नियमितता से देवता बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं। एक समय के बाद में वह हमारा इंतजार करना शुरू कर देते हैं। अगर आप 8:00 बजे जप करते हो तो वह इंतजार करना शुरू कर देते हैं कि 8:00 बजे मेरा भक्त मेरे सामने आएगा। यह एक बहुत बड़ी सफलता की कुंजी है। बल्कि सबसे बड़ी सफलता की कुंजी मंत्र सिद्धि की यही है।
दीपक प्रज्वलित करके माला करें : जब भी आप मंत्र जाप करेंगे, उस वक्त घी अथवा तिल के तेल का दीपक जलाना अनिवार्य है। दीपक आपकी पूजा , आपके मंत्र जाप का साक्षी होता है। बिना दीपक के हम किसी भी तरीके की पूजा अथवा मंत्र की सिद्धि की अपेक्षा नहीं कर सकते। चाहे पूजा ना करें लेकिन अगर मंत्र करते हैं तो पहले दीप प्रज्वलित करें फिर ही बैठे।
संकल्प अवश्य लें : आपको पानी हाथ में लेकर संकल्प करना अनिवार्य होता है। संकल्प आप रोज के जप का भी ले सकते हैं और एक साथ 25000 या 51000 मंत्रा जाप का ले सकते हैं। याद रहे कि अगर एक संकल्प ले रहे हैं तो उसे पूरा करना ही होगा। अन्यथा आप रोज की 5 या 11 माला करें और मंत्र जाप से पहले रोज का रोज सकल्प लें कि मैं इस मनोकामना के साथ यह कर रहा हूँ, प्रभु आप मेरी सहायता करें और मनोरथ पूर्ण करें। आपकी शुरुआत मांगने के साथ होगी लेकिन धीरे धीरे आप प्रभु के प्रेम में पड़ जाओगे।
हवन करें : आप जिस भी देवी या देवता का मंत्र जाप करते हैं तो एक निश्चित अवधि के पश्चात लगभग 15 दिन अथवा एक महीने में उस मंत्र जाप को हवन के माध्यम से भी उनको भेंट कर सकते हो क्योंकि जब हम मंत्र जाप का हवन करते हैं तो वह ऊर्जा संतुलित होने लग जाती है और हवन करना बहुत दुष्कर कार्य नहीं है। यूट्यूब वीडियो के माध्यम से आप अपने घर में हवन करना स्वयं सिख भी सकते हैं। दरअसल हवन करना दिव्य शक्तियों से जुड़ने का बहुत आसान और सीधा रास्ता है। हमारा भोग , हमारा मंत्र सीधे दिव्य शक्तियों तक हवन के माध्यम से पहुंचता है। अगर किसी को मंत्र सिद्धि करनी है तो हवन करना आना ही चाहिए और उसे करना ही चाहिए। हवन करने के पश्चात् आपको ब्राह्मण की दक्षिणा 51 या 101 रुपए किसी ब्राह्मण को दे देना चाहिए, उसके बिना हवन सम्पूर्ण नहीं माना जाता।
मंत्र में विश्वास : आप जो भी मंत्र जाप कर रहे हैं आपका उसमें विश्वास होना चाहिए। ऐसा नहीं हो कि आपने कभी किसी मंत्र का जप शुरू कर दिया। फिर लगा, यह तो काम नहीं कर रहा मैं दूसरे मंत्र का जाप करता हूं। ऐसे आप सफल नहीं हो पाओगे। आपको अविश्वास में रोज-रोज मंत्र बदलना नहीं है, विश्वास रखें और एक ही मंत्र का जाप करें। विश्वास की वजह से धीरे-धीरे वह मंत्र आपका फलीभूत होने लगेगा। आप जानते हैं विश्वास ही दुनिया की सबसे बड़ी ताकत है।
वो दिन जब मंत्र एक रात में सिद्ध होते हैं : दीपावली, होलिका दहन की रात्रि, महाशिवरात्रि, जन्माष्टमी और हर माह की अमावस्या को पूरी रात अगर मंत्र जाप किया जाये तो वह मंत्र एक्टिव हो जाता है और आपके लिए काम करने लग जाता है। आप उसे सिद्ध हुआ मान सकते हैं। आपको उसका प्रभाव दिखने लग जायेगा। बल्कि सामान्य रात्रि में भी अगर मंत्र जप शुरू करें तो बड़ा प्रभावकारी होता है।
मेरा स्वयं का एक यूट्यूब चैनल भी है , जिसमें मैं भक्ति पर प्रामाणिक बात करता हु। मैं किसी तरह की भ्रामक बात करने की बजाय वही बात करता हूँ जो मेरे जीवन में अथवा किसी दूसरे साधक के जीवन से सम्बंधित है, व्यवहारीक है। मेरे शब्दों को समझने में आसानी है क्योकि मैं आम आदमी को समझ आये, ऐसी भाषा इस्तेमाल करता हु। मैं ऐसे वीडियो बनाये हैं जो जिन विषयों पर यूट्यूब पर पहले कोई वीडियो उपलब्ध ही नहीं है।
एक बात ध्यान रखियेगा कि ऊपर कही गयी बात खुद पर आजमाई हुई है और प्रामाणिक है। जरुरत है तो सिर्फ विश्वास की। यूट्यूब पर बहुत भ्रामक सामग्री उपलब्ध है, उसमे 10 प्रतिशत लोग ही प्रामाणिक बात करते हैं बाकि तो सिर्फ व्यूज बढ़ने के लिए कुछ भी अनर्गल बात करते है। आप मेरा यह ब्लॉग फॉलो कर सकते हैं और मेरा यूट्यूब चैनल भी सब्सक्राइब कर सकते हैं। मैं विश्वास दिलाता हूँ कि आपको भ्रमित करने वाली बात कभी नहीं करूँगा, जिससे किसी का मार्गदर्शन हो सके, वही बात करूँगा।
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धन्यवाद। भगवन सबका भला करे।
प्रभु की सेवा में , आपका राम सेवक
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