Jaap Kitne Prakar Ke Hote Hai
जय श्री राम। आज मैं जाप कितने प्रकार के होते हैं, इस पर बात करूँगा। हम कैसे जाप करें, कि उसका प्रभाव और उसका फल कई गुना बढ़ जाये, इस बारे में बताऊंगा।
साधकों, जाप तीन प्रकार के बताये गए हैं जो कि निम्न हैं :
1. वाचिक जाप : यह जाप बोल बोल कर किया जाता है। साधक जोर से भी बोल सकता है अथवा उसकी आवाज में इतनी इंटेंसिटी होती है कि पास में बैठे लोग समझ जाते हैं कि यह कौनसा नाम जप कर रहा है। यह जाप की प्रारम्भिक अवस्था होती है, जिसमे हम पहले जाप करना सीखते हैं और बोल बोल कर करते हैं। भगवान के जाप की यह विधि भी उनकी कृपा दिलाती है और हमे उनसे जोड़ती है। इसे हम साधक के जाप अवस्था की ABCD कह सकते हैं।
2. उपांशु जाप : जाप का यह तरीका ऊपर दिए गए जाप से अधिक प्रभावशाली होता है और इसका फल उससे कम से कम 10 गुना ज्यादा होता है। इस तरीके में साधक केवल बुदबुदाता है, जिसमे उसकी आवाज बाहर तो आती है लेकिन किसी को यह समझ नहीं आता कि यह जप क्या रहा है। यह थोड़े एडवांस और mature साधक करते है। गुरुजन इसका महत्त्व ज्यादा बताते हैं। इस तरह से जाप करने का एक फायदा यह होता है कि समझ ना आने के कारन इस जाप का फल देवता चुरा नहीं सकते जबकि उपरोक्त बोलकर किये जाप में देवता जाप का फल चुरा सकते हैं क्योंकि कहा जाता है कि इंद्र को यह वरदान है कि कलयुग में जो वाचिक जाप करेगा या मंत्र, हवन करेगा उसका फल उन्हें भी मिलेगा बशर्ते साधक साधक सावधानी ना रखे तो। इसका जिक्र मैं आगे और अधिक स्पष्ट कर दूंगा।
3. मानसिक जाप : मानसिक जाप वह होता है जिसमे साधक बुदबुदाता भी नहीं है , वो सिर्फ मानसिक रूप से नाम जप या मंत्र जप कर रहा होता है अथवा अंदर ही अंदर उसकी जीभ मात्र हिल रही हो, किसी को पता नहीं चलता कि यह जाप भी कर रहा है। इस जाप का फल वाचिक की तुलना में 100 गुना ज्यादा मिलता है। यह जाप सामान्यतया ध्यान या तपस्या की स्थिति में किया जाता है और बहुत ही ज्यादा एडवांस साधक यह कर पाते हैं। इस तरह से जाप करने पर साधक को अनुभव भी होते हैं और उसे प्रभु अथवा उनके किसी विग्रह का दर्शन होना संभव है। इस जाप का फल इंद्र नहीं चुरा सकते क्योकि यह वातावरण में नहीं फैलकर सीधे साधक को प्रभु से जोड़ता है। उपरोक्त दोनों जाप चूँकि माहौल में पता चलते है तो उसकी चोरी संभव् है लेकिन इस जाप की नहीं।
जब हम प्रभु से जुड़ते हैं और नाम जप या मंत्र जप करते हैं तो धीरे धीरे स्वाभाविक रूप से हम पहली स्टेज से तीसरी स्टेज पर आ जाते हैं, भक्त की तीव्र भावना पर निर्भर करता है कि वह मानसिक तक कब तक पहुँचता है।
जहाँ तक जाप चोरी की बात है तो अधिकांश संत कहते हैं कि यह होता है जबकि कुछ संत कहते हैं कि ऐसा कुछ नहीं होता अतः इस बारे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना संभव नहीं है। लेकिन इस स्थिति से बचने के लिए एक सावधानी हम अपना सकते है , वो यह है कि जब भी हम जप करके उठें तो उठने से पूर्व अपने आसन के निचे जरा सा जल डालकर उस जल को तीन बार दोनों आँखों पर लगाएं यह बोलते हुए " ॐ इन्द्राय नमः , ॐ शक्राय नमः " इस प्रकार तीन बार यह बोलकर आँखों पर जल लगाने से जप चोरी नहीं होता।
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धन्यवाद।
आप सबका राम सेवक।
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